Instagram पर फ्रेंड बनाकर लिव-इन में रही लड़की, 8 लाख हड़पने के बाद फरार

एक लड़की ने इंस्टाग्राम के जरिए एक कंपनी के टीम लीडर से दोस्ती की और उससे 8 लाख रुपये हड़प लिए. रुपये ऐंठने के लिए लड़की कई महीने तक टीम लीडर के साथ नोएडा में लिव-इन में भी रही और अपने पिता की खराब तबीयत का हवाला देकर पैसे लेती रही. पिछले दिनों 2 लाख रुपये की फिर डिमांड की तो युवक ने मना कर दिया. इसके बाद वह उसे छेड़छाड़ के केस में फंसाने की धमकी देकर फरार हो गई.

इससे परेशान होकर पीड़ित ने जब लड़की के बारे में पता लगाया तो उसके किसी अन्य युवक के साथ जल्द ही शादी करने का पता चला. यह भी पता चला कि उसके परिवार में किसी की तबीयत खराब नहीं है बल्कि वह साजिश के तहत उससे पैसे ले रही थी. पीड़ित ने सेक्टर-39 थाने में शिकायत की है.

कुछ महीनों में ही 8 लाख रुपये हड़प लिए

पीड़ित युवक अनमोल सेक्टर-99 में रहते हैं. वह एक प्राइवेट कंपनी में टीम लीडर हैं. इनका कहना है कि 2017 में इंस्टाग्राम पर एक लड़की को फॉलो करने के बाद दोनों ने एक-दूसरे का मोबाइल नंबर लेकर बात शुरू कर दी थी. इससे दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी. पिछले कुछ महीने से लड़की नोएडा स्थित युवक के फ्लैट में भी आकर रहने लगी थी. वह कुछ दिन रहने के बाद चली जाती थी.

लड़के का आरोप है कि लड़की ने अपने पिता की तबीयत खराब बताकर कभी 50 हजार या इससे भी ज्यादा लेकर कुछ महीनों में ही 8 लाख रुपये ले लिए. पीड़ित ने बताया कि लड़की पर भरोसा करके सरकारी नौकरी से रिटायर्ड मां के पीएफ अकाउंट से पैसे निकालकर उसे दिए थे.

अचानक बिना कुछ बताए गायब हुई लड़की

पीड़ित ने बताया कि नवंबर, 2018 में लड़की ने फिर 2 लाख रुपये की मांग की. इससे पहले ही काफी रुपए देने की वजह से एक साथ दो लाख देने से मना कर दिया. लड़की के कई बार मांगने के बाद भी पीड़ित ने पैसे नहीं दिए तब उसने पहले छेड़छाड़ की शिकायत कर जेल भिजवाने की धमकी दी और फिर अचानक बिना कुछ बताए गायब हो गई.

इसके बाद लड़की के बारे में पता लगाया तो जानकारी हुई कि सितंबर 2018 में ही उसने एक लड़के से सगाई कर ली थी और अब जल्द ही शादी करने वाली है. इस बारे में ठगी का शिकार होने की शिकायत देकर पीड़ित ने कार्रवाई करने की मांग की है.

सवाल ये है कि अचानक यूपी में एकाउंटर की झड़ी क्यों लग गई? क्या य़ूपी में क़ानून व्यवस्था इस कदर चरमरा गई है कि एनकाउंटर के अलावा कोई रास्ता ही नहीं बचा? क्या यूपी में क्रिमिनल इस कदर बेलगाम हो चुके हैं कि अचानक पूरे सोसायटी के लिए खतरा बन गए? क्या यूपी की पुलिस इस कदर बेबस हो गई कि क्राइम पर कंट्रोल ही नहीं कर पा रही है? या फिर सरकार ने सबसे आसान रास्ता चुन लिया है कि क्राइम खत्म करना है, तो क्रिमिनल को ही खत्म कर दो. पर क्या ये रास्ता सही है? क्या यूपी की कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए एनकाउंटर ही एकमात्र रास्ता और आखिरी हथियार है? अगर हां, तो फिर जब तक ये एनकाउंटर जारी है, तब तक के लिए क्यों ना यूपी की तमाम अदालतों पर ताला लगा देना चाहिए? वैसे भी अदालतों की जगह इंसाफ़ तो अब सड़क पर ही हो रहा है। वो भी गोलियों से.

एनकाउंटर यानी मुठभेड़ शब्द का इस्तेमाल हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बीसवीं सदी में शुरू हुआ. एनकाउंटर का सीधा सीधा मतलब होता है बदमाशों के साथ पुलिस की मुठभेड़. हालांकि बहुत से लोग एनकाउंटर को सरकारी क़त्ल भी कहते हैं. हिंदुस्तान में पहला एनकाउंटर 11 जनवरी 1982 को मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था, जब मुंबई पुलिस की एक स्पेशल टीम ने गैंगस्टर मान्या सुरवे को छह गोलियां मारी थी. कहते हैं कि पुलिस गोली मारने के बाद उसे गाड़ी में डाल कर तब तक मुंबई की सड़कों पर घुमाती रही, जब तक कि वो मर नहीं गया. इसके बाद उसे अस्पताल ले गई. आज़ाद हिंदुस्तान का ये पहला एनकाउंटर ही विवादों में घिर गया था.

ये तमाम एनकाउंटर इसलिए सवाल खड़े करते हैं कि इनमें से हर एनकाउंटर ऐलानिया कह कर किया गया. सूत्रों के मुताबिक यूपी एसटीएफ और तमाम ज़िला पुलिस को बाक़ायदा घोषित अपराधियों की लिस्ट भेजी गई और उसी लिस्ट के हिसाब से यूपी में एनकाउंटर जारी हैं. वैसे इसे पता नहीं इत्तेफाक कहेंगे या कुछ और कि पहले खुद योगी आदित्यनाथ को यूपी सरकार और यूपी पुलिस से खुद के लिए संरक्षण मांगनी पड़ा था. वो भी संसद में. तब उन्होंने बाकायदा रोते हुए कहा था कि यूपी सरकार उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसा रही है. लेकिन वक्त बदल चुका है. अब वही योगी यूपी की सरकार के सरदार हैं और यूपी पुलिस उनके आधीन. अब संरक्षण कोई और मांग रहा है.

Comments

Popular posts from this blog

Führende Scientologen gehören zu den aktivsten Immobilienplayern der Stadt

Führende Scientologen gehören zu den aktivsten Immobilienplayern der Stadt

澳大利亚外长称拒绝中方“经济胁迫” 外交部回应